
बीजिंग। चीन ने 3,000 साल पुरानी रेशम बुनाई. तकनीक का उपयोग करके स्टील्थ लड़ाकू विमानों की रडार – शोषक कोटिंग को मजबूत करने में सफलता हासिल की है। इस तकनीक से विमान की स्टील्थ कोटिंग में आने वाली दरारों को ठीक किया जा सकता है, जिससे उसकी रडार से बचने की क्षमता बनी रहती है। वहीं अमेरिका अपने एफ-22 रैप्टर जैसे स्टील्थ विमानों की कोटिंग के क्षरण की समस्या से जूझ रहा है, जिससे विमान की स्टील्थ क्षमता प्रभावित होती है। स्टील्थ विमानों में इस्तेमाल होने वाली कोटिंग की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह तेज गति, उच्च वायुगतिकीय दबाव, रेगिस्तानी तूफानों और नमी के कारण जल्दी खराब हो जाती है। अमेरिका के लड़ाकू विमानों में हर तीन सप्ताह में इस कोटिंग को दोबारा लगाना पड़ता है, जिससे प्रति उड़ान घंटे 60,000 डॉलर तक की लागत आती है। वहीं चीन का दावा है कि उसने इस समस्या का समाधान प्राचीन बुनाई तकनीक के माध्यम से खोज लिया है। चीनी एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉरपोरेशन और तियांगोंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं हान राजवंश (206 ईसा पूर्व – 220 ईस्वी) की कार्ड बनाई तकनीक से प्रेरित एक दोहरे परत वाले मिश्रित कपड़े का विकास किया है। इस कपड़े में ताना- बुनी गई प्रवाहकीय धागों की संरचना है, जो 8-26 जीएसजेड स्पेक्ट्रम की 90.6 फीसदी रडार तरंगों को अवशोषित कर सकती है। यह पारंपरिक कोटिंग की तुलना में अधिक प्रभावी है।
