
नगांव । सुर साधना संगीत महाविद्यालय का वार्षिक समारोह 21 मार्च से 23 मार्च तक आयोजित किया गया, जिसमें सौ से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया । उद्घाटन समारोह की शुरुआत प्रख्यात कवि, लेखक और आलोचक चिदानंद देव गोस्वामी ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। प्रद्युत मिश्रा, प्राचार्य प्रताप सिंह, वरिष्ठ लेखक व पत्रकार अजय महतो अतिथि के रुप में उपस्थित थे । भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रख्यात उस्ताद प्रद्युत मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुर साधना संगीत महाविद्यालय के अध्यक्ष नव कुमार महंत ने की। चिदानंद देव गोस्वामी ने अपने भाषण में संगीत की तुलना सूर्य की किरणों से करते हुए कहा कि जिस तरह सूर्य की किरणें मानव मन को जागृत कर सकती हैं, उसी तरह संगीत भी मानव हृदय को मोहित कर सकता है। अपने भाषण में मुख्य अतिथि प्रदुत मिश्रा ने इस बात पर जोर दिया कि संगीत साधना का एक रूप है जो व्यक्ति को दुनिया पर विजय पाने में मदद कर सकता है। कार्यक्रम में कलाकारों द्वारा कई शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियां दी गई, जिनमें स्नेहा मीर का ख्याल, कुमार दत्ता का भजन और कस्तूरी देवी की गजल शामिल था। दर्शकों ने इन प्रस्तुतियों की खूब सराहना की। कार्यक्रम में कुशल दास और अतुल महंत का तबला वादन भी लोगों का मन मोह लिया। समारोह में जून राजखोवा, मुनींद्र गोस्वामी, देबला शर्मा, जोनमणि बोरा चिदानंद देव गोस्वामी, रंजन बेजबरुवा और दो सौ से अधिक अभिभावक तथा गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन सुर साधना संगीत महाविद्यालय के प्राचार्य शुवागमोनी महंत के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ । इस कार्यक्रम के माध्यम से संस्थान के छात्रों और शिक्षकों की प्रतिभा का प्रदर्शन हुआ, जिसे दर्शकों ने सराहा।
