गर्मी के तल्ख तेवर

गर्मी के तल्ख तेवर
गर्मी के तल्ख तेवर

कभी जिस मार्च के महीने को ठंड-गर्म के मिलेजुले सुहावने मौसम के रूप में याद किया जाता रहा है, उस दौरान यदि कई राज्यों में हीटवेव की चेतावनी जारी की जा रही है तो यह हमारी गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए। निर्विवाद रूप से यह दीवार पर लिखी इबारत है कि ग्लोबल वार्मिंग का गहरा असर हमारे जन-जीवन पर गहरे तक पड़ रहा है। मौसम के मिजाज में अभूतपूर्व बदलाव देखिए कि जहां हाल ही में कश्मीर, हिमाचल व उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी व कुछ राज्यों में बारिश हुई है, वहीं मौसम विभाग ने देश के पांच राज्यों में गर्म हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया है। एक ओर जहां झारखंड व ओडिशा में रेड अलर्ट जारी किया गया है तो पश्चिम बंगाल, ओडिशा और महाराष्ट्र में विदर्भ के इलाकों में गर्म हवा चलने की चेतावनी दी गई है। बीते रविवार को ओडिशा के एक शहर का तापमान 43.6 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं झारखंड में कुछ जगह पारा चालीस पार कर गया। पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में लू चलने की खबरें हैं। मौसम विज्ञानी हैरत में हैं कि जैसी गर्मी पिछले साल अप्रैल के महीने में महसूस की गई थी, वैसी गर्मी मार्च के मध्य में क्यों महसूस की जा रही है। मौसम विभाग इसकी वजह देश के ऊपर बना उच्च दबाव मानता है। वहीं साफ मौसम की वजह से सूरज की सीधी किरणें तेज पड़ रही हैं। चेतावनी दी जा रही है कि आगामी कुछ दिनों में देश के अधिकांश हिस्से तेज गर्मी की चपेट में आ सकते हैं। ऐसे में हमारी सरकारों को ग्लोबल वार्मिंग के घातक प्रभावों के मद्देनजर बचाव के उपायों को तेज करने की जरूरत है। साथ ही नागरिकों को भी जागरूक करने की जरूरत है कि लोगों का रहन-सहन, खान- पान और सार्वजनिक स्थलों पर व्यवहार कैसे रहें, ताकि लू की मार से बचा जा सके। गर्मी के दुष्प्रभाव पीड़ित लोगों के उपचार के लिये अस्पतालों में आपातकालीन वार्ड बनाए जाने की जरूरत है। यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि मौसम के तेवरों में तल्खी के चलते हमारी खाद्य शृंखला भी खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। इन तीव्र बदलावों के चलते जहां खाद्यान्नों की पैदावार में गिरावट आ रही है, वहीं किसान बाढ़ व सूखे से भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

गर्मी के तल्ख तेवर
गर्मी के तल्ख तेवर